भारत-लाओस के बीच जेसीएम बैठक में 3 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर

भारत-लाओस के बीच जेसीएम बैठक में 3 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर

शाश्वत तिवारी
नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ० एस० जयशंकर ने नई दिल्ली में लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (लाओ-पीडीआर) के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री थोंगसावन फोमविहाने के साथ 10वीं भारत-लाओ पीडीआर संयुक्त आयोग की बैठक (जेसीएम) की सह-अध्यक्षता की। यह बैठक दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित की गई। बैठक के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता शामिल है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा बलों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सहयोग को मजबूत करने के लिए हस्ताक्षर किए गए और सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर भी सहमति बनी। विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, संयुक्त आयोग बैठक के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा हमारे दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत संबंध हैं, जिनकी झलक हमें बौद्ध धर्म और रामायण की हमारी साझा विरासत में देखने को मिलती है। हमारे संबंधों का इतिहास बहुत पुराना है, जो गहरी सांस्कृतिक और जन-दर-जन (पीपल-टू-पीपल) संपर्कों पर आधारित है। बैठक के बाद डॉ० जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा हमारे संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की, जिनमें व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल क्षेत्र, कनेक्टिविटी, विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण और संस्कृति शामिल हैं। इसके अलावा, भारत-आसियान सहयोग को और आगे बढ़ाने के साथ-साथ इस क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर भी बात की। उन्होंने आगे कहा जैसे-जैसे हम अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, हमारे संबंध लगातार गहरे और विविध होते जा रहे हैं। फार्माकोपिया, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रक्षा प्रशिक्षण पर आज हुए समझौते हमारे द्विपक्षीय एजेंडे को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत और लाओस के बीच हुए यह नए समझौते न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते हैं, बल्कि ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों की एकजुटता और आत्मनिर्भरता को भी एक नया आयाम देते हैं। नई दिल्ली में हुई यह बैठक इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारत ‘ग्लोबल साउथ की आवाज’ के रूप में अपनी भूमिका को लगातार सशक्त कर रहा है।

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