5 जून “विश्व पर्यावरण दिवस” के अवसर पर देश की पहली “स्वास्तिक पंचवटी” की स्थापना की गई।


रियलमीडिया न्यूज
कानपुर।आज विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून के शुभ अवसर पर ग्राम पंचायत मकसूदाबाद में, गंभीरपुर रोड स्थित सस्ते राशन की दुकान के बगल में ग्राम समाज की भूमि पर देश की पहली स्वास्तिक पंचवटी की स्थापना जिला प्रशासन कानपुर व प्रेरणा संस्था के संयुक्त तत्वाधान में की गई।
इस संकल्पना के प्रतिपादक गौरव बाजपेई (संयोजक – गौरैय्या बचाओ अभियान) ने बताया कि इसके तहत 13 पेड़ों को स्वास्तिक के स्वरूप में समायोजित किया गया है! जिसमें पांच बरगद क्रमशः ब्रह्म,मन, बुद्धि, चित्त अहंकार स्थान पर ,चार पीपल क्रमशः धर्म, अर्थ,काम,मोक्ष स्थान पर तथा दो नीम व दो पाकड़ क्रमश प्रेम, विश्वास, श्रद्धा, समर्पण स्थान पर लगाए जाते हैं ! इस संकल्पना को जमीन पर लाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि, यह सभी बड़े पेड़ अब हमारे बीच में कम मिलते हैं विकास कार्यों के चलते यह बहुत बड़ी मात्रा में काट दिए गए हैं जबकि यह सभी पेड़ बड़े मनुष्यों के लिए लाभकारी होने के साथ पंछियों व जीव जंतुओं के आवास स्थल भी होते हैं, यदि इस तरीके की स्वास्तिक पंचवटीयों की स्थापना, हर ग्राम – हर वार्ड में की जाए तो भविष्य में पंछियों और जीवधारियो के लिए आवास की समस्या नहीं होगी तथा लोगों को भी एक अद्भुत शांति का स्थान अपने ही क्षेत्र में प्राप्त होगा जो संपूर्ण रूप से प्राकृतिक होगा।
मुख्य अतिथि श्रीमती अनुराधा अवस्थी जो कि जिला प्रशासन प्रतिनिधि के तौर पर उपस्थित थी उन्होंने इस नवीन संकल्पना की भूरी भूरी सराहना की उन्होंने बताया की यहां सभी बड़े बरगद व पीपल के बीच की दूरी 20 फ़ीट है कुल 1600 फ़ीट में अभी यह स्थापित की गई है भविष्य में इसका आकार फैलकर करीब 7000 sq फ़ीट हो जाएगा जो कि निश्चित रूप से एक जैव विविधता को धारन करने वाला एक अद्भुत स्थान बनेगा और प्रकृति प्रेमियों को एक अद्भुत शांति व गर्मी से मुक्ति देने वाला स्थल बनेने के साथ, धार्मिक लोगों के लिए यह धर्म कर्म करने का भी एक प्रमुख स्थान भविष्य में बनकर उभरेगा!
प्रेरणा संस्था के टीम मैनेजर मैनेजर सुमित नागवंशी ने बताया, स्वास्तिक चिन्ह हमारे देश में शुभता के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है तथा “पंचवटी” स्थान हमारी संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है जिसे हम रामायण से जोड़ते हैं !
उपरोक्त उल्लेखित सभी वृक्ष अति महत्वपूर्ण किस्म के हैं, तथा विकास कार्यों के कारण इन प्रजातियों के भी पुराने वृक्ष लगातार समाप्त हो रहे हैं, इन्हीं पर छोटे जीवों व पंछियों के घोसले होते थे जो कि मेटरनिटी सेंटर की तरह कार्य करते थे क्योंकि बड़े प्राचीन वृक्षों का अस्तित्व लगातार समाप्त हो रहा है इसलिए पंछियों वह पेड़ों पर निर्भर छोटे जीव जंतुओं की संख्या भी उसी अनुपात में लगातार समाप्त होती जा रही है!
इस कार्यक्रम में सहायक विकास अधिकारी पंचायत श्रीमती शालिनी मिश्रा, सचिव ग्राम पंचायत महेंद्र गौतम , ब्लॉक कोऑर्डिनेटर पुनीत सहारा, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्याय से राहुल प्रताप , गौरांग त्रिपाठी सहित छेत्रीय ग्रामवासी उपस्थित रहे

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