नई दिल्ली। देश में घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमत एक बार फिर बढ़ने के बाद सियासत तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू सिलिंडर 942 रुपये का हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सरकार पर जनता पर महंगाई का बोझ डालने का आरोप लगाया है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि भारत में आज भी गैस सिलिंडर दुनिया के कई देशों के मुकाबले काफी सस्ता मिल रहा है और सरकार आम लोगों को बड़ी राहत दे रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमत तेजी से बढ़ी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर सीधे घरेलू बाजार पर पड़ता है। सरकार ने बताया कि फरवरी 2026 में सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस करीब 543 डॉलर प्रति टन थी, लेकिन पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज मार्ग पर असर पड़ने के बाद यह बढ़कर जून में करीब 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गई। यानी चार महीनों में करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी वजह से गैस कंपनियों की लागत बढ़ी और सिलिंडर महंगा करना पड़ा।
क्या सच में भारत में गैस दुनिया से सस्ती है?
भारत में घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमत बढ़ने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या वाकई भारत में गैस दूसरे देशों के मुकाबले सस्ती है। सरकार ने अलग-अलग देशों के आंकड़े जारी कर दावा किया है कि भारतीय उपभोक्ता अभी भी दुनिया के कई देशों से कम कीमत पर रसोई गैस खरीद रहे हैं। भारत में सामान्य उपभोक्ता को 14.2 किलो का घरेलू सिलिंडर 942 रुपये में मिल रहा है। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद यही सिलिंडर प्रभावी रूप से 642 रुपये का पड़ता है। सरकार का कहना है कि यह दुनिया में सबसे कम कीमतों में से एक है। पड़ोसी देशों की बात करें तो पाकिस्तान में इसी वजन का सिलिंडर करीब 1046 रुपये का है। नेपाल में इसकी कीमत 1207 रुपये तक पहुंच गई है। बांग्लादेश में घरेलू गैस सिलिंडर करीब 1225 रुपये में मिल रहा है, जबकि श्रीलंका में इसकी कीमत लगभग 1241 रुपये बताई गई है। यानी भारत की तुलना में इन देशों में रसोई गैस ज्यादा महंगी है। विकसित देशों में कीमतें और ज्यादा हैं। अमेरिका में 14.2 किलो के बराबर घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत करीब 1755 रुपये बताई गई है। ऑस्ट्रेलिया में यह करीब 1765 रुपये तक पहुंचती है। सबसे ज्यादा कीमत कनाडा में देखने को मिलती है, जहां इसी मात्रा की गैस करीब 2411 रुपये में मिलती है। सरकार का दावा है कि अगर भारत में भी गैस की कीमत पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से तय की जाए तो एक घरेलू सिलिंडर 1600 रुपये से ज्यादा का हो सकता है। लेकिन केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियां अभी भी बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही हैं ताकि आम लोगों पर पूरा बोझ न पड़े।
विपक्ष सरकार पर क्यों हमलावर है?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गैस की कीमत बढ़ाने को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी तेल कंपनियां हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमा रही हैं तो फिर आम जनता पर महंगाई का बोझ क्यों डाला जा रहा है। मनीष तिवारी ने दावा किया कि सरकारी तेल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 77 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा कमाया। उन्होंने कहा कि जनवरी से मार्च 2026 के दौरान भी कंपनियों का मुनाफा करीब 19 हजार करोड़ रुपये रहा। ऐसे में बार-बार गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाना जनता के साथ अन्याय है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है जबकि आम लोग महंगाई से परेशान हैं।
सरकार ने राहत को लेकर क्या कहा?
सरकार का कहना है कि एलपीजी की असली लागत और बाजार मूल्य के बीच का अंतर सरकारी तेल कंपनियां और केंद्र सरकार मिलकर उठा रही हैं। सरकार ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। इसमें से 30 हजार करोड़ रुपये की भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने मंजूरी दी है।
पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को सीधी सब्सिडी मिल रही है। सरकार ने यह भी कहा कि भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल रहा जिसने पश्चिम एशिया संकट के दौरान भी अपनी ऊर्जा सप्लाई को नहीं रुकने दिया। भारतीय जहाज लगातार होर्मुज मार्ग से तेल और गैस लेकर आते रहे, जिससे देश में किसी तरह की कमी नहीं हुई।
होर्मुज संकट का भारत पर कितना असर पड़ा?
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 54 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद इस समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ गया था। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत तेजी से ऊपर चली गई। सरकार ने संकट से निपटने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाया और अमेरिका, कनाडा तथा अल्जीरिया जैसे देशों से भी गैस खरीद शुरू की। साथ ही पीएनजी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया ताकि सिलिंडर पर दबाव कम हो। सरकार ने डिलीवरी सिस्टम में ओटीपी सत्यापन भी बढ़ाया ताकि सब्सिडी वाले सिलिंडर का गलत इस्तेमाल रोका जा सके। माना जा रहा है कि जब तक पश्चिम एशिया में हालात सामान्य नहीं होते और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल-गैस की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक घरेलू गैस कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि सरकार फिलहाल आम उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ डालने से बच रही है।
सिलिंडर के बढ़ते दामों को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार बोली- दुनिया में सबसे कम
