लखनऊ। देश के प्रमुख मंदिरों में हर वर्ष श्रद्धालु अरबों रुपये का दान देते हैं। नकद राशि के अलावा सोना, चांदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं भी मंदिरों को प्राप्त होती हैं। बढ़ते दान के साथ इसकी सुरक्षा, पारदर्शिता और उपयोग को लेकर भी कड़ी निगरानी की जाती है। अयोध्या में राम मंदिर में दान की धनराशि में हेरफेर का मामला प्रकाश में आने के बाद पूरे देश में अब इस बात को लेकर लोगों में दिलचस्पी भी बढ़ गई है कि आखिर दान के रूप में मिलने वाली इतनी बड़ी राशि का प्रबंधन कैसे होता है। दान के प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। हम आपको बता रहे हैं देश और प्रदेश के कुछ प्रमुख मंदिरों के बारे में जहां हर वर्ष करोड़ों रुपये दान में मिलते हैं। ज्यादातर बड़े मंदिरों में दान की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, सीलबंद दानपात्र, डिजिटल रिकॉर्डिंग और बैंकिंग प्रणाली का सहारा लिया जाता है। राम मंदिर के चढ़ावे घोटाले में एसआईटी को जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य मिला है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट की हर तीसरे माह होने वाली बैठक में मंदिर की आय और नकद दान का विवरण प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन सोने-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य दान सामग्री की मात्रा, मूल्यांकन और उपलब्ध स्टॉक का विस्तृत ब्योरा बैठक के एजेंडे का नियमित हिस्सा नहीं था। एसआईटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वर्षों के दौरान प्राप्त हुई बहुमूल्य दान सामग्री का समुचित लेखा-जोखा किस स्तर पर रखा गया और उसकी निगरानी की व्यवस्था क्या थी। सूत्र बताते हैं कि एसआईटी को दान से संबंधित कई रसीदें और अभिलेख मिले हैं, जिनमें श्रद्धालुओं की ओर से सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य कीमती वस्तुएं चढ़ाने का उल्लेख है। हालांकि कई वस्तुओं के संग्रह, भंडारण और अंतिम स्थिति से संबंधित रिकॉर्ड अभी तक स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। इसी वजह से जांच टीम संबंधित दस्तावेज और जिम्मेदार कर्मियों से जानकारी जुटा रही है।
चढ़ावे में घोटाला: श्रद्धा संग मंदिरों में बढ़ रहा दान, राम मंदिर चंदे में चोरी के बाद पूरे देश में छिड़ी बहस
