महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र के हाल बदहालः हंसपुरम की हंस वाटिका वाटर पार्क में न पार्क बचा और न ही वाटर, तिरंगा झंडा भी गायब

महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र के हाल बदहालः हंसपुरम की हंस वाटिका वाटर पार्क में न पार्क बचा और न ही वाटर

तालाब जिसमें हंस होने चाहिए उसमें भरा है कीचड़, पड़ा हुआ है सूखा
कानपुर। लाखों रूपये की लागत से बनी आवास विकास हंसपुरम की हंस वाटिका उपनाम वाटर पार्क। इसे इस लिए बनाया गया था कि आस-पास के बाशिंदे यहां सुबह-शाम वॉक कर सकें, बच्चे झूला झूले, मस्ती करें, लोगों को ताज़ी हवा मिले, चहल पहल रहे, मगर इस वाटर पार्क के तालाब में तो पानी ही नहीं है घास उगी हुई है। बिना वाटर के वाटर पार्क नाम कुछ जमता नहीं है एक बात और कि यहां लगा हुआ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा गायब है बस यहां पर एक डंडा भर खड़ा हुआ है। राष्ट्रीय ध्वज का अपमान खुल्लम खुल्ला दिखाई दे रहा है। जब कि इसके आस-पास जल भराव और गंदगी का आलम है इसके बावजूद यहां दिन भर में कम से कम 500 लोग तो आते जाते हैं ही। क्षेत्र के विधायक भी कभी कभी अपने वोटरों को दर्शन देने आ जाते हैं। वाटर पार्क की दुर्दशा से क्षेत्र के लोग बेहद दुखी है। बारिश में अगर इसे ठीक नहीं किया गया तो यह वाटिका जंगल में बदल जायेगी। क्षेत्रीय निवासी ओम प्रकाश ने बताया कि वाटर पार्क के आस-पास विकट जल भराव है वाटर पार्क पहुंचे तो कैसे पहुंचे यह सवाल है। अनुज त्रिपाठी व्यापार मण्डल अध्यक्ष का कहना है कि अंदर के सारे झूले टूटे बाहर एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं लिहाज़ा धुप अंधेरा कायम है।
इलाके का एक प्रमुख स्थान माना जाता है। जहां दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले लगाए गए हैं, वहीं युवाओं और बुजुर्गों के लिए एक्सरसाइज मशीनों की भी व्यवस्था की गई है। सुबह और शाम यहां बड़ी संख्या में लोग योगा और मॉर्निंग वॉक के लिए भी पहुंचते हैं। आपको बता दें कि यह वाटर पार्क नगर निगम के कार्यक्षेत्र में आता है, लेकिन वर्तमान समय में यहां कई व्यवस्थाएं बदहाल नजर आ रही हैं। बच्चों के लिए लगाए गए झूलों की स्लाइड टूटी हुई दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां खेलने वाले बच्चों को चोट लगने का खतरा बना रहता है। वहीं पार्क की दीवारें भी जर्जर हालत में दिखाई पड़ रही हैं, जिन्हें लेकर स्थानीय लोग किसी बड़े हादसे की आशंका जता रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो पार्क में केवल दो सिक्योरिटी गार्ड तैनात बताए जाते हैं, जो अधिकतर मुख्य गेट पर ही नजर आते हैं। जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह लगभग 500 से 700 लोग पार्क में आते हैं और शाम के समय भी इसी तरह भीड़ रहती है। इसके बावजूद पार्क के अंदर निगरानी व्यवस्था पर्याप्त नहीं दिखती। सबसे बड़ी बात यह है कि नाम भले ही वाटर पार्क हो, लेकिन पार्क के अंदर मौजूद तालाब कई वर्षों से खाली पड़ा है, जबकि पार्क के बाहर अक्सर पानी भरा रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 5 जनवरी 2026 को यहां लगभग 14 लाख 90 हजार रुपये की लागत से 100 फीट ऊंचे तिरंगे का लोकार्पण सतीश महाना विधान सभा अध्यक्ष द्वारा किया गया था, लेकिन अब वह तिरंगा वहां दिखाई नहीं देता। लोगों का यह भी कहना है कि उद्घाटन स्थल भी क्षतिग्रस्त होने लगा है। लोगों ने यह भी बताया कि पहले शौचालय पार्क के अंदर था, लेकिन बाद में उसका निर्माण बाहर कराया गया। वहां न तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है और न ही प्रकाश की व्यवस्था दिखाई देती है। पार्क के चारों ओर सड़क होने के बावजूद कई स्थानों पर अंधेरा रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार देर रात कुछ स्थानों पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी लग जाता है। वहीं पार्क से सटे रास्तों पर कूड़ा जमा होने और सफाई व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके अलावा पार्क में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था न होने से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इन समस्याओं पर कब ध्यान देता है। क्षेत्रीय अधिकारी दिवाकर भास्कर ने रियल मीडिया संवाददाता को बताया कि झूले वगैरे 15 दिन में ठीक कर दिये जायेगे।

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