विद्यासागर त्रिपाठी
भारत में भ्रष्टाचार की गम्भीर समस्या लम्बे समय से चली आ रही है,जो बड़ा गम्भीर मुद्दा है और स्वतंत्र भारत के राजनीतिक क्षेत्र में सदैव से यह गम्भीर मुद्दा रहा है,जिसे लेकर लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां चिंता तो करती रही हैं लेकिन कोई भी पार्टी भारतीय शासन सत्ता में आकर इस भ्रष्टाचार रूपी दीमक को जो भारत को अन्दर ही अन्दर चट कर रही है को समाप्त करने का कोई ठोस कार्य नहीं कर सकीं हैं। जो अत्याधिक चिंताजनक है। स्वतंत्र भारत में कांग्रेस पार्टी एक लम्बे कालखण्ड तक सत्ता में रही लेकिन जीप, चीनी घोटाले से प्रारम्भ हुआ वह भ्रष्टाचार अंततः उस स्थान पर पहुंच गया जब तत्तकालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी को भी कहना पड़ा कि केन्द्र से भेजे गये एक रुपये में से सिर्फ 15 पैसे ही नीचे उपयोग में आ पातें है। 1991 से पूर्व का समय ‘लाइसेंसिंग राज कहलाता था’, लाइसेंसिंग से प्राप्त धन को महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रमों में व्यय न करके कुछ अभिजात वर्ग की जेबों में ही चला जाता था, इससे प्राप्त काले धन का वो एक बड़ा हिस्सा विदेशों की स्विस बैंकों और देशी व अंतरराष्ट्रीय रियल एस्टेट के रूप में स्थानांतरित कर दिया जाता था,जिसका नाम दिया गया था आर्थिक विकास। इस तीव्र आर्थिक विकास की आंधी में भ्रष्टाचार की एक ऐसी संस्कृति को जन्म दिया जहां नौकरशाहों व राजनीतिक क्षेत्र की हस्तियों ने बिना अपनी किसी जवाब देही के भ्रष्टाचार के रिकार्ड कायम कराये, तत्तकालीन सरकारों में इन भ्रष्टाचारियों पर कोई भी कारगर कदम नहीं उठाये। बाद में थोड़े थोड़े समय के लिए कांग्रेस पार्टी के अलावा भी कुछ दूसरे दलों की मिली जुली सरकारें भी बनीं,लेकिन उन्हें भी भ्रष्टाचार पर नियंत्रण कर पाने में कोई सफलता नहीं मिली। 1991 के बाद भाजपा ने आन्दोलन की रूप रेखा तैयार की और उसमें भय भूख और भ्रष्टाचार मिटाने का वायदा जोर शोर से उठाया, भारत की जनता जो गरीबी के दुख से घुट रही थी, आतंकवाद के भय से भयाक्रांत थी,साथ ही आर्थिक भ्रष्टाचार से जूझ रही थी, उसे भाजपा के नारों भय मुक्त समाज, गरीबी मुक्त समाज, व भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के ये नारे अत्यन्त पसंद आये,और इन्हीं नारों के साथ कुछ और नारों ने भाजपा की स्वीकारिता बढ़ाई,और केन्द्र में एनडीए गठबंधन की सरकार भारत रत्न मा. अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेत्रृत्व में पदारूढ़ हुई, खाद्य सुरक्षा योजना, स्वर्ण चतुर्भुज सड़क योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पेयजल आपूर्ति हेतु इन्डिया मार्का हैंड पाइप योजना, किसान बही जैसी योजनाएं लागू करके जमीनी कार्य योजनाओं के साथ साथ पोखरण परमाणु परीक्षण जैसे कार्यक्रम करके भारत को शक्ति सम्पन्न राष्ट्रों की श्रेणी में ला खड़ा किया। किन्तु अगले आम चुनाव में भाजपा को भारत की जनता ने सत्ता से बेदखल कर दिया, पुनः कांग्रेस पार्टी यूपीए गठबंधन के साथ सत्ता में आ गई। और फिर कांग्रेस पार्टी ने उन दस वर्ष के उन दो पंचवर्षीय कार्यकालों में भ्रष्टाचार के पिछले सारे रिकार्डों को तोड़ते हुए नये कीर्तिमान स्थापित किए। कांग्रेस पार्टी और यूपीए गठबंधन के उस दस वर्षीय कार्यकाल की सरकार के भ्रष्टाचार से आजिज देश की जनता ने आ.नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया, देश में पुनः भय भूख और भ्रष्टाचार मुक्त होने की आशाएं जाग्रत हुईं। भाजपा की सत्ता में पुनः वापसी होने के बाद देश में दिनों दिन बढ़ रहे आतंकवाद एवं नक्सलवाद पर लगभग मुक्ति मिल गई,जिससे देश में भय मुक्त समाज होने का अहसास हुआ, भूख मिटाने के लिए लगभग 80 करोड़ लोगों को फ्री में राशन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन देश की नस नस में व्याप्त हो चुके उस भ्रष्टाचार के दानव पर कोई भी नियंत्रण नहीं हो सका है। बल्कि और भी बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है,जिसे अर्थव्यवस्था के साथ सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण कुप्रभाव पड़ते हुए देखा जा रहा हैं। वर्तमान भ्रष्टाचार गरीबों को न्याय दिला पाने में बड़ी बाधा बनकर खड़ा है। दूसरी ओर धन सम्पन्न शक्तिशाली लोगों को वो लाभ पहुंचाकर जनाक्रोश पैदा कर रहा है। सरकारी संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार जनता के विश्वास को कमजोर कर रहा है, भ्रष्टाचार ने स्वास्थ्य सेवाओं व शिक्षा जैसे बुनियादी ढांचे को जकड़ रखा है। भ्रष्टाचार जनता को आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच सकने में बाधक बनकर खड़ा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले या वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों के लिए जीवन दुस्सह हो गया है। सार्वजनिक सड़कें आगे आगे बनती हैं पीछे पीछे उखड़ती जाती हैं। सरकार की महत्वपूर्ण योजना जल जीवन मिशन भी लगभग भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। नौकरशाही निरंकुश और आकंठ भ्रष्टाचार में लिप्त है। कोई देखने सुनने वाला नहीं है। जन सुनवाई के लिए बने विभिन्न श्रोत सफेद हाथी बन गये हैं। आईजीआरएस में की जा रही शिकायतें अधिकारी घर बैठे बिना पीड़ित व्यक्ति से संपर्क किए निस्तारित कर देते हैं, फीडबैक में संतुष्ट नहीं होने पर भी मनमाने ढंग से निस्तारित कर देते हैं। भारत के विभिन्न क्षेत्रों और सेक्टरों में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारणों से जनता जनार्दन के हृदयों में भ्रष्टाचार मुक्त भारत देखनें का सपना पाले लोगों के लिए जनका वह सपना अब भिन्न-भिन्न होता हुआ दिखाई देने लगा है। साथ ही वो लोग इसके समग्र प्रभाव से भारत के विकास पथ पर भी दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता देख रहे हैं। यदि भारत सरकार और प्रदेश सरकारों ने समय रहते भ्रष्टाचार निरोधी कठोर प्रयास नहीं किए तो जनता का विश्वास ढ़ह जायेगा।
बिखर गया वो सपना जो भ्रष्टाचार मुक्त भारत होने का देखा था
