चार ग्राम पंचायतों में 1.28 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितता पर जिलाधिकारी का बड़ा एक्शन

जीरो टॉलरेंस नीति के तहत दोषी पूर्व प्रधानों व तत्कालीन सचिव पर एफआईआर के निर्देश, भू-राजस्व की भांति धनराशि की वसूली के आदेश
जालौन। ग्राम पंचायतों में सरकारी धन के दुरुपयोग पर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने सख्त रुख अपनाया है। वर्ष 2019-20 के ऑडिट में उजागर हुई 1 करोड़ 28 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता के मामले में उन्होंने दोषी पूर्व प्रधानों और ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। सहायक निदेशक/जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियां एवं पंचायत, उरई की ऑडिट रिपोर्ट में विकास खंड नदीगांव की चार ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई।

  1. ग्राम पंचायत गंथरा – पूर्व प्रधानः रितुराज गुर्जर। अनियमितताः ₹13,05,477
  2. ग्राम पंचायत तीतरा खलीलपुर – पूर्व प्रधानः महेंद्र सिंह। अनियमितताः ₹51,64,890
  3. ग्राम पंचायत धंजा – पूर्व प्रधानः जगत सिंह । अनियमितताः ₹19,03,570
  4. ग्राम पंचायत क्योलारी – पूर्व प्रधानः जनक दुलारी । अनियमितताः ₹44,28,159
    ’कुल अनियमित धनराशिः ₹1,28,02,096
    ऑडिट के दौरान कैशबुक, माप पुस्तिका, स्टॉक रजिस्टर, व्यय प्रमाणक और कार्यवाही रजिस्टर जैसे जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में अभिलेख जानबूझकर छिपाए गए और मनमाने ढंग से शासकीय धन खर्च किया गया। इससे किए गए व्यय की पुष्टि नहीं हो सकी।
    जिलाधिकारी ने जिला विकास अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देशित किया है कि तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव प्रशांत सुभाष दुबे और चारों पूर्व प्रधानों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाए। पूरी धनराशि की वसूली भू-राजस्व की भांति की जाए। वसूली 50-50 प्रतिशत के अनुपात में दोषी प्रधान और सचिव से की जाएगी। प्रत्येक प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग कर सरकारी धन का एक-एक रुपया वसूल किया जाए। डीएम राजेश कुमार पाण्डेय ने कहा, ‘शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत शासकीय धन के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। भविष्य में ऐसी अनियमितता करने वालों के खिलाफ भी कठोर वैधानिक कार्रवाई होगी।’

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