निराकार के जीवन में आते ही ब्रह्म व माया की हो जाती है पहचानप्रचारक संतोष चौहान

 सिकंदरा कानपुर देहात 27 मई संत निरंकारी मिशन कानपुर जोन के प्रचारक महात्मा संतोष चौहान ने कहा कि निराकार के जीवन में आते ही ब्रह्म व माया की पहचान हो जाती है ।ब्रह्म जब घट में समा जाता है तो माया का पर्दा अपने आप दूर हो जाता है ।

प्रचारक महात्मा संतोष चौहान बुधवार को सिकंदरा के मरगांव गांव में आयोजित निरंकारी आध्यात्मिक सत्संग को संबोधित कर रहे थे ।उन्होंने कहा कि जब जीवन में राम नाम रूपी धन प्राप्त हो जाता है तो यह लोक ही नहीं परलोक भी सोहेला हो जाता है।उन्होंने कहा कि प्रेम ही रिश्तो की पहचान है इंसान दिल से प्यार से सुखी जीवन बिताना चाहता है लेकिन जब प्यार में स्वार्थ का भाव आ जाता है तो विश्वास में कमी आ जाती है। और रिश्तो में करवाहट महसूस होने लगती है। इंसान सुखी नहीं हो पाता क्योंकि यह संबंध भी माया का ही रूप है ।परिवर्तनशील है ।उन्होंने कहा कि प्रभु की प्राप्त के बाद एक दिव्य प्रेम सारे संसार के लिए उत्पन्न होता है जिसमें कोई भेदभाव नहीं रह जाता फिर सारा संसार ही प्यार का सागर लगता है और सारे संसार के लिए निस्वार्थ प्रेम होता है ।जो रिश्तो में भी दृढ़ता लाता है। उन्होंने कहा कि जब सतगुरु जीवन में आते हैं वह ब्रह्म ज्ञान की दांत देते हैं तो जीवन में सत्य और असत्य का ज्ञान हो जाता है कि संसार व संसार से जुड़े सब रिश्ते असत्व थे एक दिन छूट जाने है नासवान है। उन्होंने ने कहा कि संसार ही एक परिवार लगता है सारे संसार के लिए भले की भावना आती है जब निराकार ब्रह्म घट में बैठ जाता है। तब नकारात्मक भाव सब खत्म हो जाते हैं ऐसे भाव जो रिश्तो में दरार पैदा करते हैं समाप्त हो जाते हैं सतगुरु द्वारा प्रदान किए गए मानवीय गुणों से युक्त होकर संसार में हम मिश्रित करते हैं तभी ज्ञान व निराकार साथ-साथ रहता है संचालन महात्मा पवन चक ने किया।इस अवसर पर शिवकुमार गुप्ता सुखनंदन संजय सिंह सिमरन आदि महात्मा व बहने उपस्थितथे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *