निराकार को अंग संग जानकर भक्ति होती है परवानसंतोषी पाल


भोगनीपुर कानपुर देहात ।संत निरंकारी मिशन की बहन संतोषी पाल ने कहा कि निराकार को अंग-संग जानकर भक्ति ही परवान होती है ब्रह्म के दर्शन हो जाने से जीवन ही नहीं परलोक सुहेला हो जाता है ।
बहन संतोषी पाल रविवार को बाइपास स्थित अंबेडकर पार्क मैं आयोजित निरंकारी आध्यात्मिक सत्संग को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि गुरु के चरणों से ही भक्ति प्राप्त होती है ।भक्ति निष्काम होनी चाहिए तभी फल प्राप्त होता है ।
सतगुरु के, पावन चरणो से बडकर कोई तीर्थ नहीं है ।सद्गुरु के चरणों में ही सारे तीर्थ आ जाते हैं ।सतगुरु मानव मात्र को भक्ति पथ पर चला देते है
उन्होंने कहा कि सत्संग करने ,वालो के लिये परमात्मा -साक्षात अंग संग हर समय, आपके साथ खडे होते है ।सत्संग से, जुडकर सतगुरु परमात्मा को प्राप्त करने का सुलभ मार्ग ,प्रदान करते हैं ।सत्संग से ही भक्ति, प्राप्त होती है और परमात्मा ,का दर प्राप्त होता है। सत्संग से ही सतगुरु ज्ञान से हमें जोड़ ,देते हैं ।,जब मानव मात्र को ब्रह्म का ज्ञान और सत्य का बोध कराके सतगुरु ,से ज्ञान को पा करके मानव सत्य मार्ग पर चलने लग ,जाता है। पतन ,की रहा को छोडकर के सत्य परमात्मा से रिश्ता जुड ,जाता है उन्होंने कहा कि ब्रह्म ज्ञानी सतगुरु के द्वारा प्राप्त सत्संग को ,हर समय ,धारण करते हैं क्योंकि ,सत्संग में जो उपलब्धियां परमात्मा का दर और इस संसार में ,जो जीवन में प्राप्त होती है वह हमें उच्च शिखर की ओर ले जाने ,वाली होती है।, बहिन ने कहा कि गुरु की कृपा से अंधकार ,से प्रकाश की ओर चलने लग जाते हैं सत्संग को संबोधित !करते हुए कहा कि आनंद की, अनुभूति प्राप्त कर लेना। और ,परमात्मा को सतगुरु के ज्ञान से प्राप्त कर ,लेना यही आनंद मय जीवन ,होता है ।जीवन का हर सुख झोली में आता आ जाता है है मनुष्य, जब ,भक्ति की राह को चलता है । ,सत ,मार्ग की ओर चलता है सद्गुणों, को ,धारण कर लेता है गुणो का, ग्राहक बन जाता है प्रेम उसके घट में समा जाता है प्रेम से ही वह, हर, एक को ,अपने बस में कर लेता है ,और, प्रेम से ही परमात्मा, प्रकट हो, जाते हैं प्रेम से ही परमात्मा, मिल जाते हैं। संचालन बहन राजेश्वरी ने किया।

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