रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। देशभक्तों का देश के प्रति योगदान के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत मां भारती के एक क्रांतिकारी सूरमा रासबिहारी बोस की जयंती पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि रासबिहारी बोस सही अर्थों में राष्ट्रनिष्ठ पुरोधा थे। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इनका जन्म 25 मई 1886 को पश्चिम बंगाल के वर्धमान ज़िले के सुबलदाह गांव में विनोद बिहारी बोस व भुवनेश्वरी देवी के घर हुआ था। ये प्रारम्भ से ही राष्ट्रीय सोच के थे। इनकी क्रांतिकारी दल के गठन तथा आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना में प्रमुख भूमिका थी। जापान सहित कई देशों में जाकर इन्होंने वहीं से भारत की आजादी के लिए महत्वपूर्ण काम किया। ये अच्छे वकील और शिक्षाविद थे। कालांतर में 21 जनवरी 1945 में टोकियो जापान मे बोस का निधन हो गया। इस कार्यक्रम के दौरान अशोक अवस्थी, बाबूलाल, सिद्धा, रिचा, महावीर, संतोष, प्रेम, प्रिन्स, सागर, विकास, आशुतोष, अनिल, रामनारायन, मनबोधन, अजय, दस्सी आदि उपस्थित रहे।

