रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। देशभक्तों में देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत साहस और बलिदान के साक्षी ऊधम सिंह की पुण्यतिथि पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि ऊधम सिंह सही अर्थों में एक स्वाभिमानी और देश के प्रति समर्पित सूरमा थे। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इनका जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के सुनाम गांव में तहल सिंह और नारायण कौर के घर हुआ था। माता पिता की बचपन में मौत के बाद इनको अनाथालय में रहना पड़ा। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में जलियांवाला बाग के नरसंहार के समय वह जलियांवाला बाग में पानी बांट रहे थे। माईकल ओ डायर के पुलिस द्वारा नरसंहार कराने में सैकड़ों लोग मारे गए थे। उस समय इन्होंने बदला लेने का प्रण किया था। 21 साल बाद ऊधम सिंह ने लंदन में कैक्सटन हाल में माइकल ओ डायर को मारकर जलियांवाले बाग हत्याकांड का बदला ले लिया। इन्हें गिरफ्तार कर न्याय का नाटक कर लंदन में 31 जुलाई 1940 को फांसी पर लटका दिया गया। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इस श्रृद्धांजलि कार्यक्रम में प्रेम, सागर, बाबूलाल, सिद्धा, कमलेश सोनकर, महावीर, रिचा, मनबोधन, विकास, दस्सी, राहुल आदि शामिल रहे।

