भरुआ सुमेरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत कमतर आयु की मातृभूमि की वेदी पर आहुति खुदीराम बोस की पुण्यतिथि पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि खुदीराम बोस जैसे युवा बलिदानी की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। इनका त्रैलोक्य नाथ बोस और लक्ष्मीप्रिया देवी के घर 3 दिसम्बर 1889 को पश्चिमी बंगाल के मेदिनीपुर जिले में जन्म हुआ था। इनके सिर से बचपन में ही माता-पिता का साया उठने पर इनकी बहन अपरूपा ने इनकी परवरिश की थी। ये प्रारम्भ से ही देशसेवी थे। उस दौरान मुजफ्फरपुर के जज किंग्सफोर्ड क्रांतिकारियों के विरोधी थे। इसलिए खुदीराम बोस ने जज को मारने का निश्चय किया। बोस ने अपने साथी युवा क्रांतिकारी प्रफुल्ल चाकी के साथ 30 अप्रैल 1908 को किंग्सफोर्ड पर बम फेंका था। संयोग से किंग्सफोर्ड बच गये। इस घटना में दो महिलाएं मारी गई। गोरों ने बोस को पकड़कर न्याय का नाटक करते हुये फांसी की सजा दी। इन्हें 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में मात्र 18 वर्ष की आयु में फांसी पर लटका दिया गया। इस श्रृद्धांजलि कार्यक्रम के बाद संस्था द्वारा बांकी के युवा ज्ञानेन्द्र दीक्षित और कस्बा के जितेन्द्र कुमार उर्फ बन्टा के सड़क दुर्घटना में आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया। इस मौके पर सिद्धा, बाबूलाल, प्रेम, कमलेश सोनकर, भोलू सिंह, विकास, दस्सी, राहुल प्रजापति आदि लोग मौजूद रहे।

