हजार नहीं, करोड़ नहीं… शराब की खपत पहुंची अरब के पार

शीबू खान

  • जाम के साथ झूमता रहा फतेहपुर, आंकड़ों ने किया हैरान
  • चार महीनों में फतेहपुर वासियों ने गटक ली 1.77 अरब की शराब
  • शादी सीजन और सर्दी में रिकॉर्ड खपत, देशी शराब की बिक्री हुई सबसे ज्यादा

फतेहपुर। “झूम बराबर झूम शराबी” गीत की तर्ज पर फतेहपुर जनपद में बीते चार महीनों का हाल कुछ ऐसा ही नजर आया। नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच जिलेवासियों ने शराब की जमकर खपत की और सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 अरब 77 करोड़ 79 लाख 14 हजार 570 रुपये की शराब पी डाली।
जिला आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में जिले में संचालित 317 देशी शराब की दुकानों, 100 कंपोजिट (अंग्रेजी शराब एवं बियर) दुकानों और एक मॉडल शॉप पर भारी बिक्री दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार चार महीनों में 40 लाख 46 हजार 192 लीटर देशी शराब, 13 लाख 4 हजार 670 बोतल अंग्रेजी शराब और 18 लाख 17 हजार 497 केन बियर की खपत हुई। सरकारी दरों के आधार पर गणना करें तो देशी शराब से 1 अरब 9 करोड़ 24 लाख 71 हजार 840 रुपये, अंग्रेजी शराब से 52 करोड़ 18 लाख 68 हजार रुपये और बियर से 16 करोड़ 35 लाख 74 हजार 730 रुपये की बिक्री हुई। इस तरह कुल मिलाकर 1.77 अरब रुपये से अधिक की शराब की खपत दर्ज की गई, जिसमें देशी शराब सबसे आगे रही। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि आम उपभोक्ताओं में सस्ती शराब की मांग अधिक बनी हुई है। हालांकि यह पूरा हिसाब सरकारी दरों पर आधारित है, जबकि हकीकत में कई स्थानों पर ओवररेटिंग भी की जाती है, जिससे वास्तविक कारोबार इससे कहीं अधिक होने की संभावना है। इसके अलावा अवैध शराब और गैर-लाइसेंसी बिक्री का कोई आधिकारिक आंकड़ा शामिल नहीं है, जिससे वास्तविक खपत का दायरा और बड़ा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नवंबर से फरवरी के बीच शादी-विवाह का सीजन और कड़ाके की ठंड शराब की मांग बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि इस अवधि में बिक्री में असामान्य उछाल देखने को मिला। एक ओर जहां इस भारी बिक्री से सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर यह स्थिति सामाजिक और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से चिंता का विषय भी बनती जा रही है। बढ़ती शराबखोरी न केवल स्वास्थ्य पर असर डाल रही है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर भी इसका प्रभाव साफ देखा जा सकता है।
वैसे फतेहपुर में शराब की बढ़ती खपत जहां सरकार के लिए आय का बड़ा स्रोत बन रही है, वहीं समाज के लिए यह एक गंभीर चेतावनी भी है, जिस पर समय रहते ध्यान देना आवश्यक है।

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