भरुआ सुमेरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी के तहत संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने छापामार युद्ध नीति के जनक छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शिवाजी महाराज केवल मराठा साम्राज्य के संस्थापक ही नहीं थे, अपितु रणकौशल के महारथी भी थे। इनका जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी में शाहजी भोंसले और जीजाबाई के घर हुआ था। ये प्रारम्भ से ही देशधर्मी थे। इन्होंने मुगलों से जम कर लोहा लिया, औरंगजेब का भी मुकाबला किया। इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। 1674 में रायगढ़ में इनका राज्याभिषेक हुआ और ये छत्रपति बन गये। ये हिन्द स्वराज के सूत्रधार भी थे। इन पर माता पिता का बहुत प्रभाव था। बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह के बीमार पड़ने पर शिवाजी ने अवसर का लाभ उठा कर अपनी रणनीति बनाई और सबसे पहले रोहिदेश्वर दुर्ग पर अधिकार किया। उसके बाद कई किलों पर कब्जा करते हुये हिन्द स्वराज का विस्तार किया। कृष्ण भास्कर और अफज़ल खां ने संधि वार्ता के बहाने शिवाजी को मारना चाहा, किन्तु शिवाजी ने बघनख से अफ़ज़ल को मार दिया। इनके सईबाई सहित आठ पत्नियां थीं। कालांतर में इन्हें विष दिया गया और इनका 3 अप्रैल 1680 को निधन हो गया। इस कार्यक्रम में सिद्धा, प्रेम, सागर, प्रिन्स, रिचा, महावीर प्रजापति, रामनरायन सोनकर, रामबाबू, पप्पू सोनकर, पंकज सिंह, राहुल सोनकर, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।
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