रियल मीडिया नेटवर्क
राठ-।-एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और विकास को लेकर प्रतिबद्ध दिखाई देती है, तो दूसरी ओर राठ कस्बे के दो ऐतिहासिक मंदिर—श्री चौपेश्वर महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर—आज उपेक्षा के अंधकार में खोए हुए हैं। इन मंदिरों को जोड़ने वाले मार्ग जर्जर और गंदगी से पटे पड़े हैं, जिनसे होकर गुजरना श्रद्धालुओं के लिए रोज़ का संघर्ष बन गया है।
राठ-हमीरपुर राजमार्ग से लगभग 700 से 800 मीटर की दूरी पर स्थित इन दोनों मंदिरों तक जाने वाले रास्ते बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। बारिश के दिनों में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। कीचड़, जलभराव और खुले गड्ढों ने न केवल श्रद्धालुओं के आवागमन को कठिन बना दिया है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
श्री चौपेश्वर मंदिर के निकट गंदगी का अंबार, समीपस्थ देसी शराब की दुकान और मंदिर परिसर में संदिग्ध गतिविधियों का खुलेआम चलन आस्था को ठेस पहुंचा रहा है। मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर अराजक तत्वों का जमावड़ा और नवयुगलों द्वारा सार्वजनिक प्रेम प्रदर्शन स्थानीय श्रद्धालुओं में रोष का कारण बन चुका है।
नगर पालिका परिषद की कार्यशैली भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि नगर में कई स्थानों पर बिना किसी सार्वजनिक मांग के रातों-रात सड़क निर्माण कराया जा रहा है, जिनकी गुणवत्ता इतनी खराब है कि एक माह भी नहीं टिक पा रही। कई मामलों में सीमेंट की मात्रा कम पाए जाने या तकनीकी खामियों का हवाला देकर ठेकेदार और अधिकारी जिम्मेदारी से बचते नजर आते हैं।कोट बाजार पुलिस चौकी से प्रीतम चौराहे तक की मुख्य सड़क बनने के एक हफ्ते के अंदर ही कई जगह पर क्षतिग्रस्त हो गई।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता से जनता खासा नाराज़ है। जनसरोकार से दूर होकर वे केवल समारोहों और सामाजिक आयोजनों में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। दो बार के पूर्व सांसद पुष्पेंद्र चंदेल की हार को भी आत्ममुग्धता का परिणाम ही माना जाता है। वर्तमान जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से यह सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या धार्मिक स्थलों का विकास चुनावी घोषणापत्र तक ही सीमित है?
राठ जैसे ऐतिहासिक नगर में धार्मिक स्थलों की ऐसी उपेक्षा शासन और प्रशासन दोनों की संवेदनहीनता को दर्शाती है। यदि समय रहते श्री चौपेश्वर और संकट मोचन मंदिर मार्ग की मरम्मत, सुरक्षा और सफाई की व्यवस्था नहीं की गई, तो यह न केवल जनता की आस्था को ठेस पहुंचाएगा बल्कि सत्ताधारी दल की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
