रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। देशभक्तों का देश के प्रति योगदान के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत उग्रवादी आन्दोलन के अग्रदूत लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को गंगाधर रामचंद्र तिलक और पार्वती के घर रत्नागिरी जिले में हुआ था। देश के प्रति इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इन्होंने फर्ग्यूसन कालेज की स्थापना की तथा गणित के अध्यापक बने। 1890 से तिलक जी ने राजनैतिक सफर की शुरूआत कर स्वराज अवधारणा के पक्षपोषक बने। इन्होंने स्वदेशी और बहिष्कार आन्दोलन को प्रोत्साहित किया। जिस पर इन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। इनका एक मन्त्र वाक्य बहुत प्रसिद्ध रहा- स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है मैं इसे लेकर रहूंगा। इन पर तीन बार राजद्रोह का मुकदमा चलाकर 1908 से 1914 तक मांडले जेल में बंद कर दिया गया। तिलक ने जेल में ही गीता रहस्य लिखा। इस तरह तिलक जी ने अपने करीब साढ़े छः दशकों के जीवन में देश के लिए अच्छा योगदान दिया। कालांतर में एक अगस्त 1920 को मुम्बई में इनका निधन हो गया। श्रृद्धांजलि कार्यक्रम में महावीर, विकास, रामनरायन, पंकज सिंह, रिचा, सीमान्त, रितिक सोनी, प्रेम, सागर, प्रिन्स, कमलेश सोनकर, दस्सी, राहुल आदि शामिल रहे।

