
उतरौला (बलरामपुर)
उतरौला तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम फत्तेपुर में अवैध मिट्टी खनन का मामला सामने आया है, जिससे स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि थाना कोतवाली उतरौला क्षेत्र में खुलेआम नियमों की अनदेखी करते हुए मिट्टी का अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है बल्कि पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी बलरामपुर एवं पुलिस अधीक्षक बलरामपुर से मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
जानकारों की माने तो बिना वैध अनुमति के किसी भी प्रकार का खनन खनिज विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1957 तथा उत्तर प्रदेश खनन नीति का सीधा उल्लंघन है।
बिना लाइसेंस खनन करना दंडनीय अपराध है, अवैध खनन पर जुर्माना और मशीनरी जब्त की जा सकती है,
दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल तक की कार्रवाई संभव है।
अवैध मिट्टी खनन से भूमि का कटाव, कृषि योग्य जमीन की हानि और जल स्तर पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में क्षेत्र की पारिस्थितिकी को गंभीर नुकसान हो सकता है।
जिला प्रशासन और खनन विभाग की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे नियमित निगरानी करें और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। थाना कोतवाली स्तर पर भी पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, जिससे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।
फत्तेपुर में चल रहे अवैध मिट्टी खनन के मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक नियमों की अनदेखी कर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन होता रहेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
