जीएसवीएम में हॉर्मोन पर कार्यशाला कर बताए उपचार

जीएसवीएम में हॉर्मोन पर कार्यशाला कर बताए उपचार

रियल मीडिया न्यूज/पीयूष त्रिपाठी
लखनऊ। आज विश्व हॉर्मोन दिवस है। हॉर्मोन के बारे में सामान्य व्यक्ति भी जानना चाहता है, इसीलिए हॉर्मोन से संबंधित जागरूकता और जानकारियों का प्रसार किया जा रहा है। हार्माेन या ग्रन्थिरस या अंतः स्राव जटिल कार्बनिक पदार्थ हैं जो सजीवों में होने वाली विभिन्न जैव-रसायनिक क्रियाओं, वृद्धि एवं विकास, प्रजनन आदि का नियमन तथा नियंत्रण करता है। ये कोशिकाओं तथा ग्रन्थियों से स्रावित होते हैं। हार्माेन साधारणतः अपने उत्पत्ति स्थल से दूर की कोशिकाओं या ऊतकों में कार्य करते हैं इसलिए इन्हें ‘रासायनिक दूत’ भी कहते हैं। इनकी सूक्ष्म मात्रा भी अधिक प्रभावशाली होती है। इन्हें शरीर में अधिक समय तक संचित नहीं रखा जा सकता है अतः कार्य समाप्ति के बाद ये नष्ट हो जाते हैं एवं उत्सर्जन के द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिए जाते हैं। हार्माेन की कमी या अधिकता दोनों ही सजीव में व्यवधान उत्पन्न करती हैं। हार्माेन की व्यापक परिभाषा (एक संकेत अणु के रूप में जो अपने उत्पादन स्थल से दूर अपना प्रभाव डालता है) के कारण, कई प्रकार के अणुओं को हार्माेन के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। जिन पदार्थों को हार्माेन माना जा सकता है, उनमें ईकोसैनोइड्स (जैसे प्रोस्टाग्लैंडीन और थ्रोम्बोक्सेन), स्टेरॉयड (जैसे एस्ट्रोजन और ब्रासिनोस्टेरॉयड), अमीनो एसिड व्युत्पन्न (जैसे एपिनेफ्रीन और ऑक्सिन), प्रोटीन या पेप्टाइड्स (जैसे इंसुलिन और सीएलई पेप्टाइड्स) और गैसें (जैसे एथिलीन और नाइट्रिक ऑक्साइड) शामिल हैं। पौधों एवं जन्तुओं दोनो के अपने अपने हार्माेन होते हैं। पौधों में पाए जाने वाले हार्माेन को वनस्पति हार्माेन या पादप हार्माेन कहते हैं। ये जटिल कार्बनिक यौगिक पौधों के एक भाग में निर्मित होकर अन्य भागों में स्थानान्तरित हो जाते हैं तथा उन अंगों की वृद्धि, जैविक क्रियाओं पर नियन्त्रण एवं उनके बीच समन्वय स्थापित करते हैं। वनस्पित हार्माेन वृद्धि, विकास, कोशिका-विभाजन, बीजों के अंकुरण, कलिका निर्माण, अपस्थानिक जड़ों की वृद्धि, फलों के निर्माण, अपरिपक्व फलों एवं पत्तियों को गिरने से रोकने, कैम्बियम की सक्रियता एवं पौधों में होने वाली विभिन्न जैविक क्रियाओं के नियन्त्रण में सहायता करते हैं। जन्तुओं में हार्माेन का स्त्राव आमतौर पर अन्तःस्त्रावी ग्रन्थियों द्वारा होता है। ये ग्रन्थियाँ मेरूदण्डी प्राणियों में विकसित होती हैं। इनमें हार्माेन रक्त के माध्यम से अपने कार्य स्थलों तक पहुँच जाते हैं। ये प्रायः प्रोटीन, स्टेरायड, पोली पेप्टाइड प्रकृति के होते हैं। हार्माेन अपने कार्य स्थल की कोशिकाओं के कार्यों को प्रभावित करते हैं। इनके कार्य करने के तरीके इनकी रासायनिक प्रकृति के अनुसार भिन्न-भिन्न होते हैं। प्रोटीन हार्माेन एवं पोली पेप्टाइड हार्माेन कोशिकाओं की सतह पर उपस्थित संयोजको से जुड़कर कोशिका के कोशिका द्रव में रासायनिक परिवर्तन कर देते हैं जिसके परिणाम स्वरूप अपेक्षित कार्य सम्पन्न हो जाता है। स्टेरायड हार्माेन कोशिका झिल्ली को पारकर कोशिका में प्रवेश करते हैं एवं कोशिका द्रव मे किसी संयोजक से संयोग करने के बाद केन्द्रक में पहुँच जाते हैं। केन्द्रक में ये सीधे डीएनए से संयोग करके प्रोटीन संश्लेषण को प्रभावित करते हैं। सभी स्टेरायड हार्माेनों के संयोजक कोशिका के कोशिका द्रव में नहीं होते हैं, कुछ के संयोजक कोशिका झिल्ली में भी स्थित रहते हैं। विश्व हॉर्माेन दिवस 2026 के उपलक्ष्य में एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इण्डिया, कानपुर अध्याय के सहयोग से हॉर्माेन से संबंधित बीमारियां एवं उपचार के सम्बन्ध में एक जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन ओ.पी.डी. ब्लॉक लाला लाजपत राय चिकित्सालय, कानपुर में किया गया। ओ.पी.डी. ब्लॉक में लगभग 1,000 (मरीज एवं तीमारदार) इस दौरान उपस्थित थे। कार्यकम का शुभारम्भ प्रोफेसर डॉ. संजय काला प्रधानाचार्य, जी.एस.वी.एम. मेडिकल कालेज, कानपुर के द्वारा किया गया। तत्पश्चात् आचार्य एवं उप प्रधानाचार्य डा. रिचा गिरि, मेडिसिन विभाग, जी.एस.वी.एम. मेडिकल कालेज, कानपुर ने स्वागत उद्बोधन किया और हॉर्माेन और उससे संबंधित बिमारियों के बारे में बताया। तत्पश्चात् आचार्य डॉ. खुशबू अग्रवाल, सहायक आचार्य, इण्डोक्राइनोलॉजी विभाग के द्वारा हॉर्माेन्स का स्वास्थ्य पर प्रभाव, जीवन शैली एवं मेटाबॉलिज़्म के बारे में बताया गया। तत्पश्चात् आचार्य डॉ. एस.के. गौतम, आचार्य के द्वारा पुरूषों के हॉर्माेन्स से संबंधित स्वास्थ्य के बारे में जानकारी साझा की गई। डॉ. नीना गुप्ता, आचार्य, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने महिलाओं में हॉर्माेन्स से संबंधित स्वास्थ्य एवं बिमारियों के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. शैलेन्द्र गौतम, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग, जी.एस.वी.एम. मेडिकल कालेज, कानपुर ने बचपन एवं किशोरावस्था में हॉर्माेन्स से संबंधित स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य महोदय प्रोफेसर संजय काला, विशिष्ट अतिथि डॉ. रिचा गिरि, उप प्रधानाचार्य एवं डॉ. सौरभ अग्रवाल, प्रमुख अधीक्षक, एल.एल.आर. अस्पताल तथा मुख्य संयोजक डॉ. एस.के. गौतम (आचार्य), सचिव ए.पी.आई. कानपुर एवं मेडिसिन विभाग के समस्त संकाय सदस्य मौजूद थे। कार्यक्रम का आरम्भ उपप्राचार्य प्रोफेसर रिचा गिरि द्वारा प्राचार्य के स्वागत एवं उद्बोधन से हुआ। कार्यक्रम में हॉर्माेन से संबंधित रोग एवं उपचार के संबंध संकाय सदस्यों द्वारा जानकारी प्रदान की गयी। डॉ. खुशबू अग्रवाल, सहायक आचार्य, इण्डोक्राइनोलॉजी विभाग, द्वारा हॉर्माेन्स का स्वास्थ्य पर प्रभाव, जीवन शैली एवं मेटाबॉलिज़्म के बारे में बताया गया। डॉ. एस.के. गौतम, आचार्य, मेडिसिन विभाग द्वारा पुरुषों के हॉर्माेन्स से संबंधित स्वास्थ्य के बारे में जानकारी साक्षा करी गई। डॉ. नीना गुप्ता, आचार्य, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने महिलाओं में हॉर्माेन्स से संबंधित स्वास्थ्य एवं बिमारियों के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. शैलेन्द्र गौतम, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग, जी.एस.वी.एम. मेडिकल कालेज, कानपुर ने बचपन एवं किशोरावस्था में हॉर्माेन्स से संबंधित स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बी.पी. प्रियदर्शी, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ए.सी. गुप्ता, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. रीना सिंह, डॉ. विशाल कुमार गुप्ता, डॉ. जे.एस. कुशवाहा, डॉ. समीर गोविल, डॉ. आदित्य कुमार डॉ. रंजीत कुमार निम, डॉ. एम.पी. सिंह, डॉ. विनीत कुमार, डॉ. सत्यम कुमार सिंह, उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त प्रमुख अधीक्षक डॉ. सौरभ अग्रवाल, लाला लाजपत राय चिकित्सालय, कानपुर एवं अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे तथा इस चिकित्सा महाविद्यालय के अन्य विभागों के संकाय सदस्य एवं परास्नातक तथा स्नातक छात्र, पैरामेडिकल छात्र उपस्थित रहें।

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