कुछ लोगों को भाग्य के सहारे कुछ दैवीय शक्तियां प्राप्त हो जाती हैं, और वह व्यक्ति शक्ति प्राप्त करके अपने आपको सर्वशक्तिमान मान बैठता है, और फिर वह दैवीय शक्तियों को धता बताकर स्वयं ही भाग्य विधाता बनने का प्रयास करने लगता है। पूर्व काल में भगवान शिव की आराधना से प्राप्त हुई शक्तियों के कारण रावण स्वर्णमयी लंका का अजेय लंकाधिपति बन गया और रावण को घमंड हो गया कि मुझे कोई नहीं हरा सकता, श्रीकृष्ण के मामा कंश राज को भी दैवीय शक्तियां प्राप्त थीं, उसे भी घमंड था कि उसका कोई अंत नहीं कर सकता चाहे कितना भी जनता और आम लोगों के साथ अत्याचार कर लूं। लेकिन रावण का भी विनाश हुआ और कंश का भी अंत हुआ। कुछ उसी तरह से विभाजित हुए स्वतंत्र भारत में किसी का कृपा पात्र बनकर भाग्यवश कांग्रेस पार्टी सत्ता सिंहासन पर विराजमान हो गई थी। नेहरू/गांधी परिवार भारत की सत्ता में अपना जन्मसिद्ध अधिकार मान बैठा था। कुछ उसी तर्ज पर लेलिन वाद के समर्थक वामपंथी भी कुछ राज्यों में अपना एकाधिकार समझ बैठे थे। परिस्थिति जन्य रूप से दिल्ली में हुए एक अराजनैतिक आन्दोलन में सामने आये अरविंद केजरीवाल ने कुछ साथियों के साथ आन्दोलन के नेत्रृत्वकर्ता सम्मानित वयोवृद्ध नेता जी की नीतियों को धता बताकर राजनीतिक पार्टी बना डाली और भारत की राजधानी दिल्ली में प्रदेश सरकार का चुनाव लड़कर अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सत्ता सिंहासन पर स्थापित हो गए थे, उन्हें भी घमंड हो गया था कि वो अब सर्व शक्तिमान बन गये हैं। अब उन्हें दिल्ली की सत्ता सरकार से कोई नहीं हटा सकता। कुछ वैसा ही घमंड कांग्रेस पार्टी से बगावत व तिकड़म करके वहां से बाहर निकल करके ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में अलग पार्टी बनाकर 2011 में चुनाव लड़ी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बन गई थी। बाद में ममता बनर्जी को भी घमंड हो गया कि अब उन्हें पश्चिम बंगाल की सत्ता से कोई भी नहीं हटा सकता। पश्चिम बंगाल उनकी पैत्रिक सम्पत्ति है। कांग्रेस पार्टी, कम्युनिष्ट पार्टी, आम आदमी पार्टी व त्रिणमूल कांग्रेस पार्टी आदि के नेताओं को भी विश्वास हो गया था कि देश एवं प्रदेशों की आम जनता जनार्दन उन सबके छल कपट प्रपंच को कभी समझ ही नहीं सकेगी, वो लोग देश के निर्दाेष महिलाओं गरीबों पर कितने भी अत्याचार अनाचार कर लें, देश के कर दाता की खून पसीने की गाढ़ी कमाई से अपनी स्वयं की तिजोरियां कितनी भी भर लें,अपने ऐसो आराम के लिए चाहे जितने भी संसाधन जुटा लें कितनी ही चल अचल संपत्तियां जुटा लें,कोई भी देश का आम नागरिक कुछ भी नहीं कर पायेगा, वो अपनी बनाई कुटिल नीतियों से एक वर्ग विशेष का तुष्टीकरण करके और कुछ खास जातियों में वर्ग विभेद करके उनका संतुष्टीकरण करके वो लोग सदैव देश व प्रदेशों की सत्ता के सिंहासन पर काबिज रहेंगे। लेकिन जिस तरह कभी घमंडी रावण और कंश के घमंड का अन्त हुआ था, कुछ उसी तरह से ही धीरे धीरे कांग्रेस कम्युनिष्ट आप टीएमसी जैसी पार्टियों के नेताओं राहुल गांधी, डी राजा, स्वपन बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, और अब ममता बनर्जी का घमंड चूर चूर हो रहा है सत्य की जीत हो रही है। तब उक्त सभी घमंडी नेता गण अपनी पराजय की बौखलाहट में भारतीय संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए संवैधानिक मर्यादाओं का हनन करने पर उतारू हो गए हैं। द्वेश वश अपनी नैतिकता को त्यागकर दुश्मन देशों की टूल किटों के सहारे भारत के हितों को अनदेखा करके देश को कमजोर करने का हर दिन हर संभव प्रयास कर रहे हैं। दूसरी ओर देश में कुछ समाजवादी विचारधारा को मानने वाली पार्टियां हैं जो दिशाहींन होकर समाजवाद की विचारधारा से इतर जाकर तुष्टीकरण और जातीय समीकरण साधकर सत्ता में आना चाहते हैं। वहीं देश में बौध धर्म स्वीकार करने वाले डा. भीमराव अंबेडकर जी को उद्धृत करके एक नई विचारधारा अंबेडकर बाद का श्रजन करके देश में पुनः एक बार भीम मीम भाई भाई,, का नारा देकर निजी स्वार्थ पूर्ति के लिए अंबेडकर जी को बदनाम करने का काम कर रहे हैं,लेकिन भारत की आम जनता अब इन सबकी कुटिल नीतियों को भली भांति समझ और जान चुकी है और बार बार उनके घमंड को चकनाचूर कर रही है। यही कारण है कि ये सत्ताच्युत नेता अब अपने अपने स्वार्थों की पूर्ति करने हेतु ये पराजित हुए घमंडी नेतागण अपनी अपनी विचारधारा को त्याग कर एक बेमेल खिचड़ी पकाने के कार्य में जुट गए हैं लेकिन आखीर में निर्णय तो देश की जनता को ही करना है अब देखने वाली बात यह होगी कि भविष्य में भारत की जनता क्या इन सब घमंडी और सत्ता लोलुप भ्रष्ट नेताओं पर दुबारा किसी भी तरह का भी विश्वास कर पायेगी य नहीं ?
विद्यासागर त्रिपाठी
मूसानगर कानपुर देहात उप्र.
