विद्यासागर त्रिपाठी (मूसानगर)
ग्रामीण आंचल में एक कहावत कही जाती है कि :- “देवन चढ़ी सुहारी (चढ़ावा) कूकुर (कुत्ता) खायें चाहे बिलारी (बिल्ली),, प्रत्येक देव भक्त अपनी श्रद्धानुसार भोग दान चढ़ावा आदि अपनी आस्था के श्री चरणों में समर्पित करता है बाद में उस चढ़ावे को देवता के शुभकार्यों में व्यय किया जाये य कोई कुत्ता-बिल्ली प्रजाति जैसी भावना रखने वाला कोई जीवधारी उसका भक्षण करे उससे उस भक्त को कोई फर्क नहीं पड़ता ! हां अध्यात्मिक रूप से यह अवश्य कहा जाता है कि धार्मिक कर्म कांड जप पूजन कथा आदि करने कराने वाले पंडित पुरोहित पुजारी व आचार्यों को उनके द्वारा किए गए पारिश्रमिक के रूप में यजमान से ऐक्षिक दक्षिणा चढ़ावा य दान आदि अवश्य ग्रहण कर सकते हैं जो कि यजमान के लिए ही हितकारक होता है ! जिससे यजमान द्वारा स्वयं किए गए संकल्प की सिद्धिः प्राप्त होती है ।
श्रीराम जन्म स्थली मन्दिर अयोध्या धाम में श्रद्धालु श्रीराम भक्तों के द्वारा श्रद्धापूर्वक चढ़ावे दान स्वरूप सोने चांदी से निर्मित रत्न आभूषण आदि में जिस तरह की चोरी किए जाने के तथ्य छन छन कर बाहर निकल कर श्रद्धालु श्रीराम भक्तों सामने आ रहे हैं उसे देख सुनकर उनकी आस्थाओं पर कुठाराघात किया जाना महसूस हो रहा है ! सत्य कहूं तो मैंने अपनी देव दर्शन की यात्राओं के दौरान सम्पूर्ण भारत के लगभग सभी सुप्रसिद्ध मन्दिरों में जाकर देव दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त किया है,जिसको सांस्कृतिक संस्कारों से अपने हृदय में उत्पन्न अपनी धार्मिक आस्था के रूप में मानता हूं और लगभग प्रत्येक आस्थावान व्यक्ति अपनी इसी भावना के साथ ही देव दर्शन करने जाता है ! लेकिन भारत के लगभग सभी सुप्रसिद्ध मन्दिरों में व्यवस्था के नाम पर संचालित ट्रस्टों में बड़े पैमाने पर हो रहे कुप्रबंधन पर भी वहां जाकर ध्यानाकर्षण होता है लेकिन श्रद्धालु भक्त कुप्रबंधन से मुंह मोड़कर अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दर्शन लाभ प्राप्त कर अपनी सामर्थ के अनुसार दक्षिणा के रूप में धन दान समर्पित करते हैं ! कुप्रबंधन पर यदि कोई सह:यात्री भक्त प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है तो वह उसे जबाव दे देता है कि – “देवन चढ़ी सुहारी कुत्ता खाये चाहे बिलारी,, अर्थात वह अपनी श्रद्धा का दाम अपनी आस्था के चरणों में समर्पित करता है,बाद में उस चढ़ावे को देव के निमित्त मन्दिर निर्माण आदि शुभकार्यों में व्यय किया जाता है य कोई कुत्ता-बिल्ली प्रजाति की भावना रखने वाला मानव उसका भक्षण करता है उससे उसकी श्रद्धा विश्वास पर कोई अन्तर नहीं पड़ता ! हां अध्यात्मिक रूप से यह अवश्य कहा जाता है कि धार्मिक कर्म कांड पूजन कथा आदि करने कराने वाले पंडित पुरोहित पुजारी व आचार्य गण अपने किए गए परिश्रम के रूप में यजमान से ऐक्षिक दक्षिणा चढ़ावा दान आदि अवश्य ग्रहण कर सकते हैं जो कि यजमान के लिए हितकारक होता है ! लेकिन देव स्थलों पर चढ़ाये गए चढ़ावे दान आदि पर कोई चोरी छिपे हड़प करता है तो इसके फल स्वरूप उसे अगले जन्म में कुत्ता बिल्ली सुअर गिद्ध गंदी नाली के कीड़े आदि के रूप में जन्म मिलता है और नर्क जैसा जीवन अवश्य भोगना पड़ता है !
वर्तमान भारत के विभिन्न धर्म स्थलों के परिवेश कुप्रबंधन पर समय समय पर विभिन्न समाचार एजेंसियां भी प्रश्नचिन्ह लगाती रहती हैं,बात कुछ दिन सुर्खियों में बनी रहती है और मन्दिरों का ढ़र्रा थोड़े बहुत दिखावी सुधारों के बाद यथावत वैसे ही चलते रहते हैं ! क्योंकि भ्रष्टाचार का उल्लू भारत की हर साख पर बैठा है और वो उल्लू इतना शक्तिशाली हो गया है कि जो उसे वहां से हटाने का प्रयास करता है वो य तो आश्चर्य जनक रूप से स्वयं ही उस बिन्दु से हट जाता है य उसे जबरन मिटा दिया जाता है ! दूसरी ओर इन्हीं कुप्रबंधन के कुछ एक बिन्दुओं को उठाकर हिन्दुओं की धार्मिक जन भावनाओं को भड़का कर हिन्दूओं की आस्थाओं पर चोट पहुंचाते हुए धर्मांतरण कराने जैसे प्रयासों सहित कई अन्य तरह से अपना उल्लू सीधा करने का काम करते रहते हैं,जैसा इस समय पर श्रीराम मन्दिर अयोध्या धाम पर दान रूपी चढ़ावे में हुई चोरी प्रकरण को लेकर किया जा रहा है ! वह लोग जो श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के धुर विरोधी थे जो नहीं चाहते थे कि अयोध्या धाम में श्रीराम जन्म भूमि मन्दिर का निर्माण कभी हो सके,किन्तु उनके हर संभव विरोधों के बावजूद भी अयोध्या धाम में अब भव्य एवं दिव्य श्रीराम मन्दिर बनकर तैयार हो गया है तो उनके अन्दर समाहित कुंठा इस चढ़ावे में हुई चोरी प्रकरण के बाद सामने आ रही है ! वो उन राक्षसी प्रवत्ति के चोरों के बारे में कुछ भी नहीं कहते हैं,जिन्होंने षड़यंत्र करके मन्दिर के दानपात्रों एवं चढ़ावे में चोरी नहीं बल्कि डकैती जैसी घटना को अंजाम दिया है ! उनका लक्ष्य सिर्फ वो लोग हैं जिन्होंने मन्दिर बनाने में आ रही बाधाओं को दूर कराके भव्य मन्दिर निर्माण कार्य कराने में अपनी अहम भूमिका का निर्वाहन किया है !
अयोध्या धाम के श्रीराम मन्दिर निर्माण में बाधक रहे लोगों के मुंह से कभी सोमनाथ मंदिर के लुटेरे मो.गज़नबी के विरोध में एक शब्द नहीं निकलता,औरंजेब,बाबर जैसे लुटेरों के लिए मुंह नहीं खुलता ! लेकिन श्रीराम मन्दिर में हुई चोरी प्रकरण पर प्रतिदिन सुबह से शाम तक कुछ न कुछ जरूर बोलते रहते हैं कुछ लोग तो ऐसे भी है जो बाकायदा कुछ दस्तावेज लेकर मीडिया के सामने बैठकर ऐसा प्रदर्शन कर रहे हैं मानो भारत में उनसे बड़ा ईमानदार हिन्दू धर्मावलंबी भारत में दूसरा कोई और है ही नहीं ! कुछ ऐसे राजनीतिक लोग भी हैं जो मीडिया में लोकगाथाओं की धुन पर आस्था के केन्द्र पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करके उसे बदनाम करने का काम कर रहे हैं ! लेकिन यहां ऐसा लिखने के पीछे का यह अभिप्राय कतई नहीं है कि श्रीराम मन्दिर चढ़ावा चोरी पर उक्त लोगों की पिछली बातों एवं कारगुजारियों की आड़ लेकर वर्तमान चढ़ावा चोरी पर जांच में कोई ढिलाई बरती जाये ! और मन्दिर के दान एवं चढ़ावे पर चोरी करने कराने वालों पर कार्यवाही करने में कोई ढिलाई बरती जाये ! बल्कि मेरा मानना है कि आलोचना करने वालों के प्रत्येक बिन्दुओं व प्रत्येक शब्द पर गहन चिंतन मनन किया जाये ! और उनकी प्रत्येक बात का स्पष्ट जबाव दिया भी जाये,जिससे उनका झूठ बोलने वाला मुंह सदैव के लिए बंद हो सके ! तथा श्रद्धालु श्रीराम भक्तों की भावनाओं पर उत्पन्न हुए अध्यात्मिक आघात पर वही श्रद्धा और विश्वास पुनः स्थापित किया जा सके !
श्रीराम मन्दिर ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने एसआईटी गठित करके जांच शुरू करा दी है आशा नहीं पूर्ण विश्वास है कि चढ़ावे दान आदि में चोरी करने वाले बेनकाब होंगे,लेकिन समस्या का हल इतने भर से नहीं होगा ! बल्कि भविष्य में ऐसी घृणित चढ़ावा चोरी जैसी दुखद घटनाएं कभी भी पुनः श्रीराम मन्दिर परिसर में घटित न हो पायें ! इसकी भी सुदृढ़ पारदर्शी व्यवस्था भी अवश्य ही बनानी चाहिए । 🙏 जय श्रीराम 🙏 ।
