विशेष संवाददाता
राठ हमीरपुर।स्थानीय सब रजिस्ट्रार कार्यालय में अजीबो गरीब मामला सामने आया है। जिसमें कृषक के मरने के बाद भी उसने दूसरे पक्ष को अपनी कृषि भूमि की रजिस्ट्री कर दी। राठ क्षेत्र के ग्राम धनौरी निवासी हरिहर सिंह पुत्र रामनाथ सिंह हाल मुकाम कुइया रोड उरई, लखनऊ में रहने लगे थे। उन्होंने राठ पूर्व में गाटा संख्या 911 रक्बा 0.535 काफी पहले खरीदा था। हरिहर सिंह की कोई औलाद नहीं थी, और पत्नी भी नहीं थी। बाद में हरिहर सिंह भी की भी मृत्यु हो गई। उनकी जमीन के बारे में उनके भाई लक्ष्मी प्रसाद एडवोकेट को भी जानकारी नहीं थी। इस बात का पता चलने पर तथाकथित भूमाफियाओं ने किसी के बताने पर उक्त जमीन की रजिस्ट्री किसी नकली हरिहर सिंह के द्वारा रजिस्टार ऑफिस में करवा ली। जिसके क्रेता आकाश पुत्र श्री भीष्म सिंह निवासी पतखुरी तहसील सरीला(हमीरपुर) हैं। रजिस्ट्री प्रपत्रों में स्वीकार किया गया की हरिहर सिंह ने भारतीय स्टेट बैंक की चेक संख्या 962446 के माध्यम से ₹500000 क्रेता से प्राप्त कर लिए। जब इस बात का पता हरिहर सिंह के भाई लक्ष्मी प्रसाद राजपूत को लगा तो उन्होंने तहसील जाकर नियमानुसार विरासत करवाई। जिसमें वह जमीन विरासतन लक्ष्मी प्रसाद के नाम आ गई है। अब प्रश्न उठता है कि हरिहर सिंह के मरने के बाद आखिर किसने हरिहर सिंह के नाम से रजिस्ट्री कर दी? जबकि रजिस्टार ऑफिस में दसों उंगलियों के निशान तथा आधार कार्ड उपलब्ध कराना आवश्यक होता है।आधार कार्ड में हरिहर सिंह और उनके पिता तथा पता आदि सब लिखा होता है। फिर भी इस कार्यालय में व्याप्त घनघोर भ्रष्टाचार के चलते सब रजिस्ट्रार ने रजिस्ट्री कर दी।
