कलार्पण संस्था के स्थापना दिवस पर गूंजे कवियों के सरस स्वर


रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। कलार्पण भारत संस्था के स्थापना दिवस पर जिलाध्यक्ष शिवकरण सिंह की अध्यक्षता में परनामी आवास पर विचार एवं काव्य गोष्ठी संपन्न हुई। गोष्ठी के मुख्य अतिथि लखनलाल जोशी ललित, विशिष्ट अतिथि कमलेश सिंह गौर एवं चंद्रशेखर अग्निहोत्री रहे। कवि हरीराम गुप्ता निरपेक्ष ने सरस्वती वंदना के पश्चात पढ़ा आप ख्यालों में आना बंद करें,रतजगा अब किया नहीं जाता। लखनलाल जोशी ललित ने पढ़ा तुम दीप शिखा बन जलो कि जितना जलता हुआ दिया है, जिसने अपने बल पर तम से लड़ना सीख लिया है। शिवकरण सिंह सरस ने पढ़ा साहित्य संगीत कला की साधक भारतीयता पहचान बनी, कलार्पण भारत श्रेष्ठ संस्था शत शिव सुंदर हेतु सनी। नारायण प्रसाद रसिक ने पढ़ा हर समस्या का समाधान छिपा होता है, बेईमानों में भी कहीं ईमान छिपा होता है। मुन्नीलाल अवस्थी अजेय ने पढ़ा अभिशापों की धरती पर वरदान उगाने होंगे,जो अंगार विषमता के उन्हें बुझाने होंगे। कमलेश सिंह गौर ने पढ़ा फलक का हुक्म छोड़ो महार के काम, बहार से कहो भरे बसंत के जाम। गणेश सिंह विद्यार्थी ने पढ़ा मन की चाह अधूरी रह गई नीरद लौटे बरसात लिए, कृषक गले फांसी का फंदा सरकार खड़ी खैरात लिए। नीतिराज सिंह ने पढ़ा मोहब्बत वो छोटी कहानी नहीं है, आंखों से बह जाए पानी नहीं है। बीरेंद्र कुमार पाल शजर ने पढ़ा गहरी है बहुत नदिया लहरों में रवानी है, उस पार भी जाना है कश्ती भी पुरानी है। कमल किशोर कमल ने पढ़ा वृक्ष रोपकर धरा बचा लो नहीं उठेगा सलिलद ज्वार, स्वार्थ सिद्धि को रोको टोको कटे वृक्ष कर रहे पुकार। संचालक कैलाश प्रसाद सोनी मृदुल ने पढ़ा कविता कवि की करुण कसक है पीड़ा है अंतर्मन की, विकल वेदना है जीवन के आह भरे विह्वल तन की। शिक्षक वीरेंद्र परनामी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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