क्या देश में बढ़ती आसुरी शक्तियों से मुक्ति मिलेगी?लेखक


विद्यासागर त्रिपाठी
मूसानगर (कानपुर देहात)
पौराणिक कथा में पढ़ा है कि एक रक्तबीज नामक दानव हुआ करता था,जिसके शरीर से किसी से युद्ध करते समय जितनी भी रक्त की बूंदे प्रथ्वी पर गिर जाती थीं उतने ही रक्तबीज उत्पन्न हो जाते थे ! कुछ वैसी ही स्थितियां इन दिनों भारत के विभिन्न हिस्सों एवं उप्र.में चल रही हैं,देश और उप्र.पुलिस लगभग प्रति दिन किसी न किसी राक्षसी प्रवृत्ति के व्यक्ति को जब काउंटर य अर्ध काउंटर करती तो उसके अगले ही दिन नये रक्तबीज पुनः पैदा हो जाते हैं ! और यह सिलसिला लगातार उप्र.सहित देश भर में चल रहा है ! लेकिन इन रक्तबीजों से मुक्ति नहीं मिल पा रही है,देश की सेना और पुलिस हर तरह की कोशिश करके भी इन राक्षसी प्रवृत्ति के दानवों से नहीं निबट पा रही,देश में लगभग हर दिन कहीं न कही कोई न कोई राक्षसी प्रवृत्ति की गम्भीर अनैतिकताओं से युक्त सामूहिक बलात्कार, संगठित अपराध, लव-जिहाद और आतंकवाद जैसी अनेक घटनाएं आये दिन घटित हो जाती हैं ! क्या देश में घटित अमानवीय घटनाओं से निजात दिलाने के लिए किसी दैवीय शक्ति के रूप में माँ भगवती दुर्गा अथवा भगवान विष्णु को किसी रूप में अवतरित होना पड़ेगा ? क्योंकि देश और प्रदेशों की सेना व पुलिस से इन आसुरी प्रवृत्तियों से तो निपटा नहीं जा पा रहा है ! अथवा एक बार फिर मानव को अपना निज धर्म बचाने के लिए पहाड़ों की कंदराओं में छिपना पड़ेगा ? जैसा गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है —रावन आवत सुनेउ सकोहा । देवन्ह तके मेरू गिरि खोहा ॥ बरनि न जाइ अनीति घोर निसाचर जो करहिं हिंसा पर अति प्रीति तिन्ह के पापहि कवनि मिति ।कुछ ऐसे ही हालात इस समय भारत में चल रहे हैं जिसे प्रति दिन देख देख कर लोग चिंतित तो होते हैं लेकिन असहाय होकर खामोश हो जाते हैं,जिस पर जो बीत जाती है वो खून के आसू रो लेता है,शेष अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं,और यह श्रंखला अनवरत बढ़ती जा रही है,लव-जिहाद बलात्कार हत्या लूट एवं धर्मांतरण जैसी घटनाएं आम हो गई हैं ! देश के समाचार पत्रों एवं टीवी चैनलों पर ऐसी अमानवीय एवं शर्मनाक घटनाएं प्रतिदिन प्रमुखता से प्रसारित होती रहती हैं वर्तमान में भारत के सभी बुद्धिजीवी वर्ग को इस समय देश में हो रही अनीति अनाचार अत्याचार भ्रष्टाचार की घटनाओं पर बेहद गम्भीरता से विचार अवश्य करना चाहिए,तथा इन सब बढ़ती समस्याओं से निजात पाने के लिए निर्भीक निष्पक्ष “तेरा मेरा त्याग कर,, जाति वर्ग से ऊपर उठ कर एकजुटता के साथ सार्थक कदम उठाने चाहिए,नैतिकता के साथ खड़े होकर उन्हें अनैतिकता का मुखर विरोध करना चाहिए,तभी देश में बढ़ रही वर्तमान इन आसुरी प्रवृत्ति की शक्तियों से निजात पाई जा सकती है, देश और प्रदेशों की सत्तारूढ़ सरकारों को भी अपना राजनैतिक लाभ हानि विचारे बिना राष्ट्रहित में हर सम्भव कदम उठाने चाहिए,अन्यथा की स्थिति में हम सब देश वासियों का सिर्फ भगवान ही मालिक होगा

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