कानपुर में किडनी रैकेट का पर्दाफाश, दिल्ली-मुंबई लखनऊ से आते थे डॉक्टर

कानपुर में किडनी रैकेट का पर्दाफाश

रियल मीडिया न्यूज नेटवर्क/कानपुर। कानपुर के किडनी रैकेट के खुलासे के बाद क्राइम ब्रांच और पुलिस की टीमें इसकी जड़ें तक खंगालने में जुट गई हैं। टीम ने आरोपी शिवम को हिरासत में लेकर सोमवार को कई घंटों तक पूछताछ की। उसने पुलिस को बताया है कि कैसे किडनी खरीद का काला धंधा चलता है। आरोपी ने बताया कि शक न हो इसके लिए किडनी खरीदने वाले को अपना रिश्तेदार बताया जाता है। उसे गरीब और परिवार का एकमात्र सहारा बताकर कम से कम दाम में सौदा करने की कोशिश की जाती है। इसके बाद जरूरतमंद के परिजन को उसकी गिरती सेहत का हवाला देकर जल्द से जल्द किडनी का इंतजाम करने के लिए कहा जाता है। बाद में उसे एक डोनर के विषय में बताकर उसकी खर्च करने की हैसियत आकी जाती है। जरूरतमंद के परिजन के तैयार होने पर उसे कई गुना मुनाफा लेकर बेचा दिया जाता है। ऐसे में अब पुलिस उन अस्पतालों के बारे में जानकारी जुटा रही है जिनमें ट्रांसप्लांट किया गया, या इसके बाद मरीज और डोनर को भर्ती कर उनका उपचार किया गया।

पुलिस की पूछताछ में यह भी बात सामने आई है कि सभी अस्पताल बर्रा, नौबस्ता, पनकी और कल्याणपुर जैसे क्षेत्रों में चल रहे हैं। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इन अस्पतालों में मरीज को गाल ब्लैडर, पथरी या आंतों का रोगी बताकर भर्ती किया जाता था। जहां डोनर को जल्द छुट्टी दे दी जाती। किडनी लेने वाले मरीज को कई माह तक भर्ती रखा जाता। हर अस्पताल में उसके बारे में नई बीमारी बताई जाती है। आरोपी की जानकारी से पता चला है कि रैकेट में ट्रांसप्लांट मामले से जुड़े रहे कई डॉक्टर और नर्सिंग होम के नाम शामिल हैं। पुलिस की टीमें उसके बताए गए अस्पतालों और डॉक्टरों से पूछताछ कर सच्चाई जानने में जुट गई हैं। चर्चा है कि पुलिस की टीमें पश्चिम बंगाल और हरियाणा भी गई हैं। बताया जा रहा है कि वहां के युवकों से भी किडनी की खरीद फरोख्त हुई है। मामले में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लाट के मामले में जितने भी नाम सामने आए हैं, सभी की भूमिका की जांच की जा रही है। 22 साल पहले भी शहर में किडनी की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया था। इसमें पॉश इलाके में स्थित एक नर्सिंग होम और उसमें कार्यरत सर्जन का नाम प्रकाश में आया था। आरोप था कि रैकेट में शामिल आर्थिक रूप से कमजोर या किसी अन्य बीमारी का इलाज कराने आए मरीज की उसके संबंधित जांचों के साथ की किडनी की भी जांच की जाती थी। जिस मरीज को किडनी की जरूरत होती थी, उससे मैच करने पर किडनी निकालकर ट्रांसप्लांट की जाती थी। मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में सीबीसीआईडी ने इस मामले की जांच की थी। इसमें शामिल सर्जन वर्तमान में भी चिकित्सा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पुलिस को आवास विकास स्थित आरोही हॉस्पिटल में किडनी डोनर भर्ती मिला है। यह हॉस्पिटल करीब दो माह पहले बंद हो चुका है। सूत्रों के अनुसार पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मरीज को हॉस्पिटल के संचालक राजेश के कहने पर भर्ती कराया गया था। पुलिस को मौके से मरीज के नाम का हॉस्पिटल वाला पर्चा मिला है। किडनी रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने किडनी डोनेट करने वाले और ट्रांसप्लांट कराने वाले की सेहत को देखते हुए उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया है। देर शाम को एंबुलेंस से पुलिस सुरक्षा में दोनों को अस्पताल भेजा गया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लखनऊ, मुंबई और दिल्ली से स्पेशलिस्ट बुलाए जाते थे। ट्रांसप्लांट की टीम में नेफ्रोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट सर्जन, यूरोलॉजी और ग्राफ्टिंग एक्सपर्ट होते थे। साथ ही एनेस्थेसिस्ट, डायटीशियन भी टीम का हिस्सा होते थे। कानपुर के कल्याणपुर में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट करने का मामला प्रकाश में आया है। यहां के एक अस्पताल में उत्तराखंड के युवक से करीब दस लाख रुपये में किडनी खरीदने का सौदा हुआ। किडनी निकलवाने के बाद दलाल ने उसे जरूरतमंद मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दिया। अवैध तरीके से की गई किडनी की इस खरीद-फरोख्त का सुराग लगने पर सोमवार को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अस्पतालों में छापा मारा। पुलिस ने दलाल, अस्पताल संचालक, डॉक्टर दंपती समेत दस लोगों को हिरासत में लिया है। एक अस्पताल का संबंध आईएमए के एक बड़े पदाधिकारी से बताया जा रहा है। कल्याणपुर के आवास विकास तीन निवासी शिवम अग्रवाल पर आरोप है कि उसने उत्तराखंड के युवक को दस लाख में किडनी बेचने का ऑफर दिया था। बताया था कि उसके रिश्तेदार को किडनी की जरूरत है। रुपयों की जरूरत के चलते युवक ने हामी भर दी। रावतपुर स्थित एक अस्पताल में किडनी निकाली गई। दलाल शिवम ने इसी अस्पताल में भर्ती मुजफ्फरनगर की महिला मरीज (35) के परिजन को 90 लाख रुपये से अधिक में किडनी बेच दी। सूत्रों के मुताबिक किडनी बेचने वाले युवक को छह लाख रुपये नकद और 3.5 लाख का चेक दिया। किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद दोनों मरीजों को 24 घंटे तक इसी अस्पताल में रखा गया इसके बाद दोनों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। किडनी रैकेट की जांच कर रही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार रात तीन अस्पतालों में छापा मारा। इनमें कल्याणपुर आवास विकास एक नंबर स्थित प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, केशवपुरम रोड स्थित आहूजा हॉस्पिटल, पनकी कल्याणपुर रोड स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल शामिल हैं। टीम ने किडनी संबंधी रोगों के भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी जुटाई। छापे की इस कार्रवाई को किडनी रैकेट से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इसमें से कुछ अस्पताल किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट मामले में शामिल हो सकते हैं। कोई भी पुलिस अधिकारी खुलकर आरोपियों की गिरफ्तारी या भूमिका के बारे में बोलने से बच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार दस लाख में सौदा तय होने के बाद डोनर को सिर्फ 9.5 लाख रुपये दलाल शिवम ने दिए थे। 50 हजार के लिए शिवम उसे टरका रहा था। इसकी शिकायत पीड़ित ने पुलिस से की। पुलिस ने जांच की तो किडनी रैकेट की परतें खुलती चली गईं। देर रात क्राइम ब्रांच ने युवक के बताए दोनों अस्पतालों में छापा मारा। जांच में वहां उसके भर्ती होने के सबूत मिले हैं। क्राइम ब्रांच ने दोनों हॉस्पिटल के संचालक, डॉक्टर दंपती और दलाल शिवम को हिरासत में लिया। वहीं, किडनी लेने वाली मरीज को भी आवास विकास के एक अस्पताल में शिफ्ट करा दिया गया था। पुलिस ने उस हॉस्पिटल में भी जांच की। वहां से पांच अन्य लोगों को उठाकर पूछताछ की जा रही है।

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