स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज औरैया को मिला पहला शरीर सेंगर दंपति ने पूरा किया अपना वादा शिक्षा विभाग के अधिकारी की देह भी बिखेरेगी शिक्षा का प्रकाश रियल मीडिया नेटवर्क औरैया 19 मई 2025,। इक्कीस साल पहले कानपुर से युग दधीचि देहदान अभियान प्रारंभ कर पूरे प्रदेश में इसका विस्तार करने वाले मनोज सेंगर एवम माधवी सेंगर ने आज राजकीय मेडिकल कॉलेज औरैया को अध्ययन हेतु पहली देह कानपुर से लाकर समर्पित करते हुए अपने उस वादे को पूरा किया जो उन्होंने विगत 25 अप्रैल को आयोजित देहदान जागरूकता सेमिनार में प्राचार्या महोदय से किया था, आज कानपुर से देह लेकर आए सेंगर दंपति ने बताया कि आरोहम हैप्पीनेस होम, लवकुश नगर बिठूर कानपुर निवासी 89 वर्षीय सेवा निवृत्त शिक्षा विभाग के अधिकारी विजयपाल जैन ने जनवरी 2018 में देहदान संकल्प किया था, आज 19 मई प्रातः 5 बजे हृदयरोग संस्थान कानपुर में उनका निधन होने पर उनकी पुत्री डॉ अनुपम जैन ने मनोज सेंगर को सूचना देकर देहदान संकल्प पूरा कराने का आग्रह किया, इस पर अभियान की महासचिव माधवी सेंगर ने देह को औरैया मेडिकल कॉलेज को देने का निश्चय किया, अभियान प्रमुख मनोज सेंगर ने सुबह ही कानपुर में उनका नेत्रदान कराया तत्पश्चात देहदान के आवश्यक पत्रक तैयार किए और दोपहर एक बजे कानपुर से चल कर शाम चार बजे सेंगर दंपति औरैया मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां एनाटॉमी हेड डा मेधा दास ने अपने सहयोगी डा राकेश तिवारी एवम छात्रों की उपस्थिति में पार्थिव देह को सम्मान सहित स्वीकार किया, इस अवसर पर प्राचार्य डॉ एम वी सिंह देहदानी परिवार एवं सेंगर दंपति का बहुत बहुत आभार जताया, देहदान अभियान के अंतर्गत यह 299वीं देह दान कराई गई है महासचिव माधवी सेंगर ने बताया कि यह 299वीं देह दान कराई है,
अबतक पूरे प्रदेश में 4000 से अधिक लोगों ने देहदान संकल्प किया हुआ है,
कानपुर से चलते समय दिवंगत विजयपाल जैन जी का पुत्र ललितांग जैन, पुत्रियां डॉ अनुपम जैन, रूपम सिंघल एवं डॉ पूनम जैन सहित गणेशशंकर तिवारी, डॉ उमेश पालीवाल, मुकेश पालीवाल, डॉ के एस दुबे, सुनील पालीवाल सहित परिजनों द्वारा पार्थिव देह की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत देहदानी को अंतिम विदाई देते हुए औरैया के लिए रवाना किया,
जीवन भर शिक्षा का प्रकाश बांट कर में देश की सेवा करने के बाद अपनी पार्थिव देह को भी समाज हित दान कर देने वाले स्वo विजयपाल जैन की समाज के हर वर्ग में चर्चा होती रही, पुत्री अनुपम ने बताया कि बहुत सालों से वे सब गायत्री परिवार से जुड़े हैं और पिताजी धार्मिक आयोजनों में उत्साह से भाग लेते थे, आज सात साल बाद उनके देहदान संकल्प को पूरा करते हुए संतोष का अनुभव हो रहा है इसके लिए उन्होंने युग दधीचि देहदान अभियान का हृदय से आभार व्यक्त किया,

