भरुआ सुमेरपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में रामचरित मानस के रचयिता विश्व कवि तुलसीदास एवं कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के उपलक्ष्य में साहित्यिक विचार एवं कवि गोष्ठी संपन्न हुई।
गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के जिलाध्यक्ष लखनलाल लाल जोशी तथा संचालन मंत्री कैलाश सोनी ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ कवि हरीराम गुप्त निरपेक्ष ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर किया। शायर मुहम्मद सलीम ने पढ़ा, अब की पीढ़ी खुशहाल रहे,हम रखें सुरक्षित अपना कल। गजलकार वीरेंद्र पाल शजर ने पढ़ा,नदी बिकी है गांव की,खोदी गई खदान,बचा न कोई बाढ़ से डूबे सभी किसान। कवि धर्मात्मा प्रसाद अभिलाषी ने पढ़ा,रामभक्त बजरंग बली,क्या गदा चलाना भूल गये। कवि गणेश सिंह विद्यार्थी ने पढ़ा,अनुतापों के बोझिल पथ में,आशाओं का उत्कर्ष छिपा है। हरीराम गुप्त निरपेक्ष ने पढ़ा-परम शान्ति है रामराज्य है,मेरे जीवन गांव में। सहमंत्री गजेंन्द्र नारायण दीक्षित ने पढ़ा- हुलसी मां का नाम था पिता आत्मा राम। रत्नावली अर्धांगनी, जनमत बोले राम। गीतकार नाथूराम पथिक ने गाया-राम कथा तुलसी बाबा ने लिखी नहीं होती। भाभी में मां सी पावनता दिखी नहीं होती। वरिष्ठ कवि नारायण प्रसाद रसिक ने पढ़ा-रामचरित मानस रची तुलसीदास ने, घर घर पढ़ी जाती तुलसी की पाती है। हास्य कवि दिनेश कुमार दुबे ने पढ़ा-नाव समझ बाबा चढ़े,लगी थी दिल में चोट। मुर्दा यूं बहने लगा,जैसे मोटर बोट। कवि कमलेश सिंह गौर ने अपनी प्रांजल बोली की कविता पढ़ी-अब वहै मोर करनी अब वहै मोर भरनी। गोष्ठी के संयोजक उमेश कुमार सोनी ने अपने मधुर कंठ से रामभजन गीत गाया। संरक्षक शिवकरण सिंह सरस जी ने भी तुलसीदास जी पर प्रभावी एवं प्रेरक रचना पढ़ी। कैलाश सोनी ने मुंशी प्रेमचंद्र पर अपनी वार्ता प्रस्तुत की। मानस मर्मज्ञ आनंद कुमार सिंह एवं एमएल अवस्थी ने तुलसीदास के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर अपने विचार व्यक्त किए। अंत में अध्यक्ष लखनलाल जोशी ललित ने कृतज्ञता ज्ञापित किया। इस अवसर पर आयोजक उमेश कुमार सोनी ने सभी कवियों का प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया।
