भरुआ सुमेरपुर। एक दशक पूर्व बना नेशनल हाईवे 34 खूनी हाईवे के रूप में आए दिन लोगों की जान ले रहा है। साथ ही जाम का झाम भी प्रतिदिन बना रहता है। इसके बाद जनप्रतिनिधि इस समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए अपनी आवाज नहीं बुलंद कर रहे हैं। इससे लोगों में आक्रोश व्याप्त रहता है। सुबह हाईवे में हादसे का शिकार होने के बाद जाम में फंसकर जान गंवाने वाले युवक की खबर कस्बे में फैलते ही लोगों में आक्रोश नजर आया। सभी ने एक स्वर में कहा कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण लोगों की आयेदिन जानें जा रही हैं।
वर्ष 2014 में कबरई से कानपुर हाईवे का निर्माण हुआ था। तब यह हाईवे 86 नंबर हुआ करता था। बाद में इसको 34 नंबर कर दिया गया। नंबर का गेम जरूर बदला गया लेकिन इसका स्वरूप आज भी पूर्व की तरह है। डिवाइडर न होने से इसमें प्रतिदिन हादसे होते हैं। कस्बे में 24 घंटे के अंदर दो हादसे हुए। एक युवक कानपुर में मौत एवं जिंदगी की जंग लड़ रहा है। यह सोमवार को सुबह करीब 10.30 बजे हादसे का शिकार हुआ था। दूसरा हादसा मंगलवार को सुबह 6.30 बजे हुआ। इस हादसे में घायल युवक को परिजन निजी वाहन से इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर जा रहे थे। जिस वक्त युवक को हमीरपुर ले जाया जा रहा था। उस वक्त हाईवे भीषण जाम से जूझ रहा था। जाम में घायल युवक का वाहन भी फंस गया और यह करीब ढाई घंटे जाम में फंसा रहा। इसी बीच युवक ने कुछेछा के समीप दम तोड़ दिया। जब परिजन उसे लेकर सदर अस्पताल पहुंचे। तब वहां डॉक्टर ने युवक को देखते ही मृत घोषित कर दिया। इससे परिजनों में कोहराम मच गया। युवक के मरने की खबर जैसे ही कस्बे में आई। लोगों के अंदर आक्रोश पनप उठा और लोगों के मुंह से अनायास ही निकलने लगा कि जब तक इस खूनी हाईवे का विस्तारीकरण नहीं होगा। तब तक यह ऐसे ही जाने लेता रहेगा। यह कार्य तभी संभव है जब जनप्रतिनिधि बुलंदी के साथ इसके विस्तारीकरण की मांग करेंगे।
